ग्राफीन क्या है?
आइए सबसे पहले जानते हैं कि ग्राफीन क्या है? – ग्राफीन (Graphene) कार्बन से बना एक बेहद पतला, मजबूत और हल्का पदार्थ है। यह इतनी पतली परत होती है कि इसकी मोटाई सिर्फ एक परमाणु जितनी होती है। इसे आप एक तरह की 2D चादर के रूप में समझ सकते हैं, जिसमें कार्बन के परमाणु छत्ते जैसी छह-कोनी आकृति (hexagon) में आपस में जुड़े होते हैं, ठीक वैसे जैसे मधुमक्खी का छत्ता दिखता है।
हाल ही में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Meity) ने विकसित भारत @2047 के विजन के तहत इंडिया ग्राफीन इंजीनियरिंग एंड इनोवेशन सेंटर (IGEIC) का शुभ आरंभ किया है ।
IGEIC इंडिया ग्राफीन इंजीनियरिंग एंड इनोवेशन सेंटर कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत धारा -Q के तहत पंजीकृत एक गैर लाभकारी उद्देश्य वाली कंपनी है।
इंडिया ग्राफीन इंजीनियरिंग एंड इनोवेशन सेंटर (IGEIC) का उद्देश्य :-
इसे विशेष रूप से ग्राफीन तकनीक के वाणिज्यिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक उत्कृष्ट केंद्र स्थापित करने हेतु गठित किया गया है।
फोकस एरिया :
इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा भंडारण से लेकर स्वास्थ्य सेवा के अलावा मटेरियल कोटिंग एवं परिवहन प्रणालियों तथा सस्टेनेबल मटेरियल का विकास करना शामिल है।
तिरुवनंतपुरम (केरल) में इसका R & D रिसर्च एंड डेवलपमेंट केंद्र स्थापित किया गया है । बेंगलुरु (कर्नाटक) में कॉर्पोरेट एवं बिजनेस डेवलपमेंट सेंटर स्थापित किया गया है।
ग्राफीन के बारे में
इसकी खोज 2004 में आंद्रे ग्रीम कांस्टेंटिन नावोसेलोव ने की थी | इसके लिए उन्हें 2010 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार भी दिया गया था। यह कार्बन का एक अपरूप है, और ग्रेफाइट का बिल्डिंग – ब्लॉक है | ग्रेफाईट का उपयोग पेंसिल बनाने में किया जाता है।
यह कार्बन परमाणुओं की एकल परत (द्विआयामी) होती है ,जो सघन रूप से षटकोणीय मधुमक्खी के छत्ते जैसी संरचना में होती है।
इसे असाधारण इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रिकल गुणों के कारण एक अद्भुत सामग्री ( Wonder material) कहा जाता है। यह स्टील से 200 गुना अधिक मजबूत है जबकि इसका वजन स्टील का सिर्फ 1/6 हिस्सा ही है।
ऑप्टिकल पारदर्शिता :– यह केवल 2-3% ही प्रकाश को अवशोषित करता है| इस विशेषता के कारण यह पारदर्शी टच स्क्रीन , सौर सेल और डिस्प्ले प्रौद्योगिकियों के लिए एक आदर्श सामग्री है।
उच्च तापीय चालकता :– कमरे के तापमान पर ग्राफीन की तापीय चालकता 5000 वाट केल्विन तक हो जाती है जो कि अधिकांश अन्य सामग्रियों की तुलना में बहुत अधिक है।
अपारगम्य अभेधता:– यह गैसों के लिए अभेद है यहां तक की हाइड्रोजन और हीलियम जैसी हल्की गैसों के लिए भी।
क्वांटम गुण:– ग्राफीन में क्वांटम हॉल प्रभाव संभवतः मेसोलॉजी , क्वांटम कंप्यूटिंग और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स में योगदान दे सकता है।

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ग्रॉाफिन के संभावित उपयोग
इलेक्ट्रॉनिकल उपयोग:
सिलिकॉन की तुलना में अधिक मजबूती और ऊर्जा दक्षता के कारण इसका उपयोग ग्राफीन आधारित अर्धचालकों को विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
ऊर्जा भंडारण:
ग्राफीन का पृष्ठीय छेत्रफल काफी अधिक ( 2630 m 2/r ) होता है। जो इसे बैटरी और सुपरकपैसिटर जैसे ऊर्जा भंडारण उपकरणों के लिए उपयोगी बनाता है।
वॉटर फिल्ट्रेशन प्रौद्योगिकी:
इस तकनीक में ग्राफीन नैनोपोरस मेमब्रेन का उपयोग जल के विलवणीकरण और फिल्ट्रेशन के लिए किया जा सकता है। ग्राफीन नैनोपोरस मेमब्रेन के छिद्रों आकर और फिल्ट्रेशन के दौरान लगाया जाने वाले दाब के अनुसार इसकी दक्षता 33 % से 100% तक हो सकती है।
पर्यावरण:
यह देखा गया है की ग्राफीन अपने से 600 गुणा भरी तरल पदार्थ को भी अवशोषित कर सकता है। इसके अतिरिक्त, ग्राफीन इथेनॉल, जैतून के तेल, निट्रोवेनजीन, एसीटोन और डाइमिथाइल सल्फोक्साईड को भी अशोषित कर सकता है।
बायो मेडिकल:
इसका ऑक्सीकृत रूप ग्राफीन ऑक्साइड (GO ) कहलाता है। इसमें कम सामटोटॉक्सिसिटी कोशिकाओ पर विषैला प्रभाव होता है जिससे यह चिकित्सा के विभिन्न उपयोगो के लिए उपयुक्त हो जाता है। उदाहरण के लिए टिशू इंजीनियरिंग, दवा / जिन डिलीवरी, फोटोथेरपी, कोशिकीय वृद्धि और विभेदन, बायोसेलर, बायो- इमेजिंग , कैंसर या अन्य रोगों का पता लगाना आदि।
रक्षा एवं सुरक्षा:
ग्राफीन की असाधारण मजबूती इसे कवच और बैलिस्टिक सुरक्षा के लिय एक बेहतर सामग्री बनाती है।
ग्राफीन से जुडी चुनौतियां
मानव स्वास्थ्य जोखिम:
कुछ अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है की ग्राफीन ऑक्साइड और ग्राफीन कि विषाक्तता मानव की कोशिका झिल्ली के सीधे संपर्क में आने के बाद लिपिड झिल्ली को नष्ट कर देते है, जो मानव के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
उच्च उत्पादन लागत:
इनके कारण ग्राहक आधार सीमित हो जाता है और इसके लिए बाज़ार का विकास भी बाधित होता है। इसलिए विशेष रूप से मूल्य – संवेदनशील छेत्रो में इसे व्यापक रूप से अपनाये जाने की संभावना कम हो जाती है।
बैंड गैप की समस्या:
इसके कारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोग करना मुश्किल हो जाता है। अर्धचालक सामग्री में बैंड गैप होना जरूरी होता है ताकि उसे चालू और बंद किया जा सके।
वैश्विक परिदृश्य
☆ ग्राफीन अनुसंधान में अग्रणी देश चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया , रूस और सिंगापुर है।
☆ चीन और ब्राज़ील ग्राफीन के वाणिज्यिक उत्पादन में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देश है।
☆ भारत की तुलना में चीन लगभग 20 गुना अधिक ग्राफीन का उत्पादन करता है।
☆ ग्राफीन का उत्पादन सीमित है और वर्षों तक इसे केवल सीमित मात्रा में ही उत्पादित किया गया था।
ग्राफीन को बढ़ावा देने के लिए भारत में की गयी पहले
☆ ग्राफीन आरोरा कार्यक्रम:
इसे स्टार्टअप और उद्योगों को पूर्ण सुविधा प्रदान करके अनुसंधान एवं विकास तथा वाणिज्यीकरण के बीच के अंतराल को समाप्त करने हेतु शुरू किया गया है।
☆ इंडिया इनोवेशन सेंटर फॉर ग्राफीन (IICG):
इसे केरल में स्थापित किया गया है। यह डिजिटल यूनिवर्सिटी ऑफ़ केरल , सेंटर फॉर मैटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिकस टेक्नोलॉजी ( C – MET ) टाटा स्टील लिमिटेड का एक सयुक्त उद्यम है। जिससे meity द्वारा विकसित किया गया है।
☆ अनुशंधान संसथान:
IIT रूड़की द्वारा इन्क्यूवेटेड “लॉग 9 “ ने ग्राफीन आधारित अल्ट्राकपैसिटर के लिए एक प्रद्योगिकी का पेटेंट कराया है। नैनो एवं मृदु पदार्थ विज्ञान केंद्र (CeNs) 102 ग्राफीन अनुसंधान में सक्रिय रूप से शामिल है।
निष्कर्ष:
निःसंदेह मौजूदा शोध से ग्राफीन कम्पोजिट, हाइब्रिड मैटेरियल्स स्केलेबल प्रोसेसिंग तकनीकों में नवाचारों को बढ़ावा मिल रहा है। जैसे – जैसे ये प्रयास विकसित होंगे ग्राफीन एक अत्यंत महत्वपूर्ण मटेरियल बन सकता है। इससे कई छेत्रों में हाई परफॉर्मेंस उपकरणो, ऊर्जा दक्षता और संधारणीय प्रद्योगिकीयो में सफलता मिल सकती है।