पृथ्वी की आंतरिक संरचना
पृथ्वी की आंतरिक संरचना को जानना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है क्योंकि हम इसके केंद्र तक नहीं पहुँच सकते। भूवैज्ञानिक इस रहस्य को समझने के लिए प्रत्यक्ष स्रोत जैसे खनन, ज्वालामुखी और अप्रत्यक्ष स्रोत जैसे भूकंपीय तरंगों, तापमान व घनत्व का उपयोग करते हैं। आइए जानें इस अध्ययन की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया।
प्रश्न.1 पृथ्वी की आंतरिक संरचना को जानने के लिए भूवैज्ञानिक किन-किन स्रोतों का उपयोग करते हैं, इस पर चर्चा करें।
पृथ्वी की त्रिज्या लगभग 6,370 किलोमीटर है और इसके केंद्र तक पहुंचना लगभग असंभव है, इसलिए हमें इसके आतंरिक हिस्सों की जानकारी दो स्रोतों से प्राप्त होती है:- प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष स्रोत।
अर्थात भूवैज्ञानिक पृथ्वी की आंतरिक संरचना की जानकारी पाने के लिए दो प्रकार के स्रोत का उपयोग करते हैं:-
1. प्रत्यक्ष स्रोत (Direct Sources)
2. अप्रत्यक्ष स्रोत (Indirect Sources)
1. प्रत्यक्ष स्रोत (Direct Sources)
i . गहरी खनन
- खनन वह प्रक्रिया है जिसमें पृथ्वी के अंदर से खनिजों और उपयोगी पदार्थों को निकाला जाता है, जो समुद्र के नीचे भी पाए जाते हैं।
- यह मुश्किल होता है क्योंकि जैसे-जैसे हम गहराई में जाते हैं, तापमान बढ़ता है और यह उपकरणों के लिए बाधा बन जाता है। पृथ्वी की अंदरूनी गर्मी के कारण उपकरण पिघल सकते हैं, क्यों पृथ्वी के अंदर हर 30 मीटर पर तापमान लगभग 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है।
(उदाहरण):- पृथ्वी की सबसे गहरी खान दक्षिण अफ्रीका में है – म्पोनेग सोने की खान, जो 3.9 किलोमीटर गहरी है।
ii . ड्रिलिंग (छिद्रण)
- ड्रिलिंग पृथ्वी की परत में छेद करने की प्रक्रिया है।
- भूवैज्ञानिक पृथ्वी के अंदरूनी भाग को जानने के लिए दो परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं।
जैसे:- गहरे समुद्र की ड्रिलिंग परियोजना और एकीकृत समुद्र ड्रिलिंग प्रभाव।
गहरी ड्रिलिंग 1970 में सोवियत संघ द्वारा कोला प्रायद्वीप में केवल 12.10 मीटर गहरी पहुंची थी।
iii. सतही चट्टान
- वे चट्टाने जो हमें पृथ्वी की सतह पर मिलती है, उन्हें खदानों से प्राप्त किया जाता है।
- खदानों में गहराई तक जाना मुश्किल है क्योंकि वहाँ अत्यधिक गर्मी होती है।
iv.ज्वालामुखी विस्फोट
- ज्वालामुखी विस्फोट एक और प्रमुख स्रोत होते हैं जो हमें सीधे जानकारी प्रदान करते हैं।
- ये हमें पृथ्वी के अंदर पाए जाने वाली सामग्री की संरचना और गुणों के बारे में बताते हैं, जो पिघलकर मैग्मा के रूप में बाहर आती है।
- मैग्मा कक्ष जो एस्थेनोस्फीयर में पाया जाता है।
- वैज्ञानिक ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान निकलने वाली मैग्मा से सामग्री एकत्र कर सकते है। जिससे पृथ्वी के अंदरूनी हिस्से के बारे में कुछ जानकारी मिलती है। लेकिन पृथ्वी की गहराई मापना असंभव है।
अप्रत्यक्ष स्रोत (Indirect Sources)
(i) तापमान
- पृथ्वी की गहराई में जैसे-जैसे नीचे जाते हैं, तापमान बढ़ता जाता है। यह एक महत्वपूर्ण संकेत है जिससे यह पता चलता हैं कि पृथ्वी के अंदर गर्मी है और वहाँ पिघली हुई चट्टानें हो सकती हैं।
- हर 33 मीटर की गहराई पर तापमान में लगभग 1°C की वृद्धि होती है। यह वृद्धि भू-तापीय प्रवणता (Geothermal Gradient) कहलाती है। कुछ जगहों पर यह अधिक होती है, जैसे ज्वालामुखी क्षेत्रों में। यह तापमान हमें बताता है कि पृथ्वी के अंदरूनी हिस्सों में बहुत अधिक ऊष्मा है, जो प्राचीन गर्मी और रेडियोधर्मी तत्वों के विघटन से आती है।
(ii) घनत्व
- पृथ्वी कि गहराई बढ़ने के साथ घनत्व भी बढ़ता है। न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण नियमों के अनुसार, पृथ्वी का घनत्व 5.5 (ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर) के रूप में गणना किया गया है।
(iii) दबाव
- जैसे तापमान और घनत्व बढ़ते हैं, वैसे ही पृथ्वी के अंदर गहराई के साथ दबाव भी बढ़ता है। जिसका मूल कारन ऊपर की सारी परतों का भार नीचे की परतों पर पड़ना है।
- यह दबाव इतना अधिक होता है कि वह चट्टानों को पिघलाने या उनका रूप बदलने की क्षमता रखता है।
- पृथ्वी के कोर (core) में दबाव सबसे अधिक होता है।
(iv) गुरुत्वाकर्षण असमानताएँ
- पृथ्वी की सतह पर हर जगह गुरुत्वाकर्षण समान नहीं होता।
- गुरुत्वाकर्षण ध्रुवों के पास अधिक होता है और भूमध्य रेखा पर कमजोर होता है।
- गुरुत्वाकर्षण असमानताओं के कारण पृथ्वी की अपने केंद्र से दूरी बदलती रहती है।
- इससे हमें पृथ्वी की सतह पर पदार्थों के वितरण को समझने में मदद मिलती है।
Read More:- सिंधु जल संधि क्या है और यह चर्चा में क्यों है? Indus Water Treaty
(v) भूकंपीय गतिविधि
- सिस्मिक गतिविधि, जिसमें पृथ्वी के अंदर के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए भूकंप भी एक महत्वपूर्ण स्रोत है।
भूकंपीय तरंगें
भूकंपीय तरंगें पृथ्वी के अंदर ऊर्जा के अचानक रिलीज होने से उत्पन्न होती हैं, जैसे कि भूकंप के समय। ये तरंगें सभी दिशाओं में फैलती हैं और पृथ्वी की परतों से होकर गुजरती हैं।
-
इन तरंगों को मापने के लिए वैज्ञानिक सिस्मोग्राफ (Seismograph) का उपयोग करते हैं।
-
जब भूकंप आता है, तो तरंगें अलग-अलग गति और व्यवहार के साथ विभिन्न परतों से गुजरती हैं।
भूकंप की तरंगें दो प्रकार की होती हैं:
- काय तरंगें (Body Wave)
- सतही तरंगें (Surface Wave)
ये तरंगें पृथ्वी के अंदर, मेंटल और कोर से होकर गुजरती है। ये भूकंप के केंद्र से निकलने वाली पहली तरंगें होती है।
1. काय तरंगों के दो प्रकार होते हैं:
P-तरंगें (Primary Wave)
- इन्हें प्राथमिक तरंगें कहते हैं।
- ये एक लंबी तरंग (Longitudinal Wave) होती हैं, जो सबसे पहले आती हैं।
- इनकी गति सबसे तेज होती है।
- ये सभी माध्यमों (ठोस, तरल, गैस) में यात्रा कर सकती हैं।
S-तरंगें (Secondary Wave) या सतही तरंगे
- इन्हें द्वितीयक तरंगें कहा जाता है।
- अनुप्रस्थ तरंग (Transverse wave)
- इनकी गति P तरंगों से कम होती है।
- ये केवल ठोस पदार्थों में यात्रा करती ह
सतही तरंगें (Surface Wave)
L-वेव (L-Wave)
- ये एक पारदर्शी तरंग (Transverse Wave) होती है।
- ठोस में इसकी गति 3.51 किमी/सेकंड होती है।
- भूकंप के दौरान ये सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाली तरंगें होती हैं।
-
यह अनुप्रस्थ सतही तरंग होती है।
निष्कर्ष:
पृथ्वी की आंतरिक संरचना:- यह एक गतिशील और जटिल प्रणाली है, जिसमें डेटा एकत्र करने के लिए विभिन्न स्रोतों का उपयोग किया जाता है। पृथ्वी के अंदर के बारे में समझ विभिन्न वैज्ञानिक विधियों के माध्यम से आगे बढ़ी है। पृथ्वी के अंदर के बारे में जानकारी प्राप्त करना आपदाओं के प्रबंधन में मदद करता है और उनके प्रभाव को कम करने में भी सहायक होता है।